कौन सी खान-पान की आदतें आपको लंबी उम्र देती हैं?

कौन सी खान-पान की आदतें आपको लंबी उम्र देती हैं?

लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन, ये दो चीजें हैं जो दुनिया का हर इंसान चाहता है। हमारा स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम क्या खाते हैं और क्या नहीं खाते हैं। भोजन को लेकर समय-समय पर कई शोध हुए हैं। आज हम आपको एक ऐसे शोध के बारे में बता रहे हैं, जिसके अनुसार कुछ खाद्य पदार्थ आपको सौ साल की उम्र दे सकते हैं।

1. जानिए रिसर्च में क्या हुआ खुलासा

दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वाल्टर लोंगो और रोज़लिन एंडरसन ने एक शोध किया है। पोषण के बारे में किए गए कई अध्ययनों और शोधों की जांच करने के बाद, लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन के लिए सही आहार पाया गया है। इस शोध के अनुसार खान-पान में कई बातों का ध्यान रखकर आप लंबी उम्र और बिना बीमारी के जीवन प्राप्त कर सकते हैं। इस शोध में भोजन में किन चीजों को शामिल करना है, कितनी कैलोरी लेनी है, कितनी देर तक और कितनी बार उपवास रखना है।

2. लंबी उम्र के लिए क्या खाएं?

यह शोध यह भी बताता है कि मध्यम से उच्च मात्रा में कार्बोहाइड्रेट को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। शरीर को जितनी आवश्यकता हो उतनी ही प्रोटीन लेनी चाहिए।

प्रोफेसर लोंगो बताते हैं कि लंबी उम्र के लिए आपको फलियां सब्जियां, हर तरह के अनाज और मछली को भरपूर मात्रा में आहार में शामिल करना चाहिए। अपनी प्लेट से रेड मीट को पूरी तरह हटा दें। सफेद मांस बहुत कम मात्रा में खाया जा सकता है। चीनी की मात्रा कम ही रखें। काजू, बादाम, अखरोट जैसे सूखे मेवे अच्छी मात्रा में खाने चाहिए और खाने में थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट भी शामिल करनी चाहिए।

उपवास भी है जरूरी

शोध में कहा गया है कि हर प्रकार का भोजन 11 से 12 घंटे के बीच करना चाहिए ताकि शेष 12 घंटे का उपवास किया जा सके। इसके साथ ही हर 3-4 महीने में 5 दिन उपवास करके आप बीमारियों के होने के खतरे को कम कर सकते हैं।

4. विशेषज्ञों की देखरेख में ही आहार बदलें

इस शोध में यह भी बताया गया है कि क्या खाना चाहिए, लेकिन कितना खाना चाहिए यह नहीं बताया गया है। प्रोफेसर लोंगो का कहना है कि इस शोध में वर्णित दीर्घायु आहार किसी भी व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य और उम्र को ध्यान में रखकर अपनाना चाहिए। हर व्यक्ति को डायटीशियन की देखरेख में डाइट प्लान बनाना चाहिए। अपने मौजूदा आहार में तुरंत बड़े बदलाव करने से बेहतर है कि छोटे-छोटे बदलाव किए जाएं जिन्हें धीरे-धीरे अपनाया जा सके।

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